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Hymn No. 2545 | Date: 11-Feb-2001
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बदल जाता है बहुत कुछ पलों में, बदल न पा रहा हूँ ढलती जिंदगी में।
बदल जाता है बहुत कुछ पलों में, बदल न पा रहा हूँ ढलती जिंदगी में।
पास तेरे पहुंचके मिल जाती है मंजिल बहुतों को, मेरी तो शुरूआत है।
अपनी दिल की बात कहूं कैसे तुझसे, न मिलने पे बहुत जोर करता है।
तंग हुआ हूंगा अपने आप से कई बार, पर तंग दिल न है मेरा औरो से।
मन का मालिक न हूं इतना, जितना बदनाम हूँ अपनो की निगाहों में।
अधूरे ख्वाबों को पूरा करने के वास्ते, तलाश है इस दिल को तेरी।
पाने से ज्यादा खोया हूँ अपने आपको, फिर भी हारने का न अहसास है।
जिसका हाथ पकड़ एक बार को, श्वास छूटने पे न छोड़ता हूँ हाथ उसका।
दरखास्त देता हूँ एक बार नही कई बार, कब आयेगीबारी मेरी पास तेरे।
उधार की जिंदगी से दूर रहके, जीना चाहता हूँ सुधार के जिंदगी मे नाम तेरा।


- डॉ.संतोष सिंह