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Hymn No. 2546 | Date: 15-Mar-2001
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क्या हो गया तेरे हाल को, क्यों ना बदल रहा है तू अपनी तबियत को।
क्या हो गया तेरे हाल को, क्यों ना बदल रहा है तू अपनी तबियत को।
बदली न जाने कितनों की जिंदगी, क्यों न बदल रहा है तेरे हाल को।
विश्वास की अखंड ज्योत क्यों टिमटिमाये अंधकार से भरी दुनिया में।
तेरा मुकाम तो निश्चित है, भटकाने को मजबूर हो जायेगे एक बार फिर से हम।
तेरे कृपा से आये थे सुपथ पे, फिर से चले जायेगे माया के पथ पे।
दौर गुजारे ना गुजरे, जिंदगी में तेरे बिना न लगे अब कुछ भी अच्छा।
समझाया कई बार मन को, पर वो मजबूर हो गया है दिल के हाथों।
जैसे तैसे गुजर तो जायेगी जिंदगी, पर सब कुछ टूट जायेगी तेरे न होने पे।
मजबूर होके तू न आना, पर योग्यता को परवान चढ़ाने तू जरूर आना।
मारा हूँ मैं तेरे प्यार का, तेरी मर्जी से जिसमें तू चाहना उसमें ढाल देना।


- डॉ.संतोष सिंह