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Hymn No. 2548 | Date: 09-Mar-2001
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कब सुनाऊंगा तुझे दिल की हर बात मेरे।
कब सुनाऊंगा तुझे दिल की हर बात मेरे।
वख्त की न होगी बंदिश, न किसी ओर बात की।
देखे हुये सपनों में भरता रहूँगा रंग प्यार का तेरे।
छेडूंगा रह रहके प्यार के तरानों से तुझे हर पल।
जिंदगी की पूरी हो जायेगी मेरी हर साघ।
कोई न होगा मेरे ओर तेरे सिवाय वहां।
रोम रोम से बहती रहेगी प्यार की निर्झर धारा।
उल्लास कायम का होगा, उमगो की बरसात में।
रीता हुआ जो था, वो बीते हुये कल की बात होगी।
सारे सपने भूत ओर भविष्य से पूरे होंगे यथार्थ में।


- डॉ.संतोष सिंह