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Hymn No. 2549 | Date: 09-Mar-2001
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मत तोल मुझे, मत तोल, तेरे दूनियावी मोल के वास्ते मत तोल मुझे मत तोल।
मत तोल मुझे, मत तोल, तेरे दूनियावी मोल के वास्ते मत तोल मुझे मत तोल।
करते वख्त करमें को न पूछा था तूने कुछ मुझसे, ये सब है उसका ही मोल, मत तोल मुझे।
हंसते हुये उठ़ानी पड़ती हे जिंदगी की सारी नागबारियाँ कहना पड़ता है तेरी मेहरबानीयाँ।
किसी भी पल क्या हो जाये होती नही कुछ खबर, फिर भी अदा करना पड़ता है शूक्रिया।
जो न जानते है उससे भी ज्यादा कटता है कर्मों का बोझा, न जाने कितनी रहमत बरसाता है।
हमारा जान हुआ कुछ न होता है, उसके जाने को जानते बोली बंद सी हो जाती है।
कहना आँसा होता है, पर हालातों से गुजरने पे पल पल मन रोता है।
न जाने कितना होता है, उसका कुछ ही हिस्सा हमपे गिरता है गिरके भी कुछ न होता है।
सब कृपा है सद्गुरु की, जो हर हाल में रखता है हमको अपनी छत्रछाया में।
मत तोल उसे, मत तोल उसे, अनजाने में तोलके पापों का भार मत ले तू अपनें ऊपर।


- डॉ.संतोष सिंह