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Hymn No. 2551 | Date: 16-Mar-2001
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अब ओर न सताओ, प्रभु हमसे तुम दूर न जाओ।
अब ओर न सताओ, प्रभु हमसे तुम दूर न जाओ।
कहूंगा लाख कथा तुम्हारी, पर सुन लो व्यथा दिल की हमारी।
न जाने कब से कितने जाने अनजाने कर्मो को सहता रहा है तू हमारे।
जोश में बहके होश में न रहे, फिर भी अनवरत की कृपा तूने।
अब की बार दागदार जिंदगी से निकलके, बेंदाग बनके रहूँगा पास तेरे।
उन सपनो को जो तूने संजोया है, भर दूंगा उसमें प्यार रंग अपने।
बिगड़ी बाते बनाके मिटाऊँगा तेरे दिल की सारी व्यथा को।
न जनमने दूंगा अब कोई रंज, तेरे दिल को जीत लूंगा दिल से अपने।
सौगात मैं करुँगा कुर्बान अपनी जान कई बार, जाने न दूंगा तुझे पास से अपने।
नये सिरे से शुरूआत करुँगा जिंदगी कि, अर्पित करुँगा हर पल की बंदगी।


- डॉ.संतोष सिंह