Hymn No. 2552 | Date: 24-Mar-2001
जरा धीर धरो, जरा धीर धरो, शुरूआत हुयी है अभी जिंदगी की।
जरा धीर धरो, जरा धीर धरो, शुरूआत हुयी है अभी जिंदगी की। पर धीर न रखना तुम अपनी मेहनत में, करना पुरजोर पुरूषार्थ जीवन में। जरा धीर धरो, जरा धीर धरो, सब्र का फल होता है मीठा जीवन में। पर धीर न रखना तूम अपने दायित्वों को पूरा करने में, पूरा करने में। जरा धीर धरो, जरा धीर धरो, समय की परीक्षाओं से पार लगाता है धीरज। पर धीर न रखना तुम परम पथ पर चलने में, चलने में। जरा धीर धरो, जरा धीर धरो, अपने इंद्रधनुषी ख्वाबों को पूरा होने में, पूरा होने में। पर धीर न रखना तुम प्रभु प्रेम का प्याला पीने में पीने में। जरा धीर धरो, जरा धीर धरो, प्रभु को उलाहना देने से, उलाहना देने से। पर धीर न रखना तुम प्रभु का कहा हुआ कर जाने से, कर जाने से। जरा धीर धरो, जरा धीर धरो, जो हुआ है उसको दोष देने से, दोष देने से। पर धीर न रखना तूम जीवन के हर पलों में मुस्कुराने से, मुस्कुराने से। जरा धीर धरो, जरा धीर धरो, अंजाम का प्याला पीने में, पीने में। पर धीर न रखना तुम जीवन में प्रभु का गूण गाने से, गुण गाने से।
- डॉ.संतोष सिंह
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