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Hymn No. 2553 | Date: 26-Mar-2001
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तू न तार लगायेगा, तो कौन तारेगा हमको।
तू न तार लगायेगा, तो कौन तारेगा हमको।
जो तू छोड़ जायेगा, तो कौन साथ निभायेगा।
तू न प्यार करेगा, तो कौन अपनायेगा हमको।
जो तू न बतलायेगा, तो हम कैसे जान पायेंगे।
तेरे दर पे जो न मिला आसरा, तो कहाँ मिलेगा सहारा
जो तू न सुनेगा, तो किसको दिल का हाल सुनायेगे।
तेरे आगे झोली न फैलायेंगे तो, कीस से क्यों मांगने जायेंगे।
तू ना जुड़ सका जीवन में, तो क्या मतलब हें मानव तन का।
तू ही बता आज तुझसे दूर रहके कितना जनम बिताऊंगा।
जो साध न सका मन को तो, कैसे तुझको पाऊंगा।


- डॉ.संतोष सिंह