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Hymn No. 2554 | Date: 26-Mar-2001
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ओ नाथों के नाथ, ओ.. नाथों के नाथ, इस अनाथ को कब तू अपनायेगा
ओ नाथों के नाथ, ओ.. नाथों के नाथ, इस अनाथ को कब तू अपनायेगा
खाली झोली को कब तू भरके जायेगा।
इस अंधियारी दुनिया में आस की किरण झिलमिला रही है तेरी ओर।
विश्वास का घी डालते डालते, अब खत्म होने जा रही है।
माना गम दिये हैं कई तुझे, पर हमारा दिल भी दर्द से अछूता न था।
तेरी बातों को झुठलाना न चाहा हूँ कभी, पर अपना हाल तुझसे कहने आया हूँ।
बीतने को तो बीत रही है जिंदगी, न जाने कैसे तेरे बिन जिये जा रहा हूँ जिंदगी।
अंधेरा न है तो ये कैसी देर है, जो सवेर होने को ना हो रहा है।
विरह की तड़प पल-पल तड़पाये, ओर जिंदगी झड़प मार के मार खिलाये।
देखो अनदेखा कब तक तू करता रहेगा, जिंदगी कब तक ऐसे जीता रहूँगा।
औरो का न हूँ मैं कुछ चाहता, में तो सच्चे संतोष को हूँ पाना चाहता।


- डॉ.संतोष सिंह