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Hymn No. 2558 | Date: 16-Apr-2002
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पुकारे - पुकारे, मां - मां कहके पुत्र तोरा,
पुकारे - पुकारे, मां - मां कहके पुत्र तोरा,
आंखो मे आँसु लिये लगाये गुहार अवरूध्द कंठ से।
व्याकुल चित्त, भटके नजर खोज में तोरे चारो ओर।
दिल धड़क उठे किसी भी अनजान आहट से।
चित्त में हूक सी लगे, मां कहे तू तो नहीं।
सारे ख्वाबों को खों चुका हूं, जो मन तार हार हो चुका है।
लपलपाये आस की इक् ज्योत, तेरे आँखों से करते हुये पान अमृत का।
जीते जी मिल लेना चाहू इक् बार के लिये, हर बार के लिये।
सारे अरमानो को त्याग के, सध जाना चाहूँ तेरे प्यार के लिये।
दुर्गम राहों को कर जाना चाहता हूँ पार, श्वासों के रहते।
पुकारे पुकारे, मां मां कहके पुत्र तोरा।


- डॉ.संतोष सिंह