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Hymn No. 2559 | Date: 18-Apr-2002
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यादों का क्या कहना, वो तो हर पल सतायेगी दिल को।
यादों का क्या कहना, वो तो हर पल सतायेगी दिल को।
ख्वाबों को कैसे रोकना, वो तो हर पल आयेगी नींदो में।
ख्यालों को कैसे टोकना, वो तो हर पल लुभायेगी मन को।
जजबातों को कैसे दबाऊँगा, वो तो हर पल उभरेंगे रग रग में।
प्यार को कैसे छोड़ पाऊंगा, वो तो अहम् हिस्सा बन गया जो तन मन का।
बातों को जो कहना न हो तुझसे, तो वो कैसे रोक पाऊँगा खुद को।
निभा न सका दुनियावी रस्मों को, तो कैसे पूरा कर पाऊँगा तेरे कसमों को।
रह ले चाहे तू दूर हमसे कितना भी, दिल की बात सुनाने से न रोक पायेगा।
ऐसी कौन सी बात जो छूपी हो तुझसे, तो सूनाना पड़े अपनी व्यथा को।
रहना पड़ेगा जीवन के हर पलों में, पूरा करना होगा प्यार की रस्मों को।


- डॉ.संतोष सिंह