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Hymn No. 2565 | Date: 01-May-2002
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दिल की बात है तो दिल से पूंछ लो, दिल तो पागल है तेरे प्यार में हरदम।
दिल की बात है तो दिल से पूंछ लो, दिल तो पागल है तेरे प्यार में हरदम।
उसे होश इतना भी न है क्या पूछा तूने, सुनने से पहले मुस्कराके तेरा कहा है माना।
गुमाँ न है उसे प्यार का अपने, न जला है कभी किसीके प्यार को देखके।
हां सीखा जरूर है औरों से, प्यार करने का नया नया अंदाज जिंदगी में।
मुरखाई कहो या बेवकूफी डूबा रहता है, ख्यालों ओर ख्वाबों की दुनिया में।
तरसता है साकार करने को तेरे अरमानों को, न जाने क्यों रुका हुआ है अब तक।
कांटो तो खून नहीं, जब माया के मद में चूर होके दूर होता है तुझसे।
तड़प उठता है जैसे मीन बगैर जल के, दौड़ते तेरे पास पहुँचता है जो दिल।
सोंचता हूँ रहबर न लड़खड़ाये कदम कभी मेरे, गर गिरुँ तो दिलबर गोद में।
हर पल खिला रहने वाला दिल, भरता है घूँट विरह के प्यालों का।


- डॉ.संतोष सिंह