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Hymn No. 2566 | Date: 04-May-2002
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हरि हि ॐ ..., हरि हि ॐ ..., हरि हि ॐ ...
हरि हि ॐ ..., हरि हि ॐ ..., हरि हि ॐ ...
मां यहां - वहां, जहां - तहां सारे जहाँ में तू ही तू है, तेरे सिवाय कुछ भी नहीं।
मेरा मन हो या दिल, या इस तन का रोम–रोम के कोने में बसा है तू ही तू।
तुझसे अलग कही कुछ भी नहीं, सारे तन-मन में प्रभु तू ही तू है।
कौन कहता है कि तू नजर नहीं आये, आंखो में तेरी ही ज्योति समायी है।
पर्वत हो या नदी आकाश, नयनाभिराम दृश्यों में दिखायी देती है तसवीर तेरी।
कैसे कहूँ तू बोले न कुछ, जब जब दिल की धड़कन सुनूँ जो तेरे ही बोल बोले।
अकेले ही नही संसार के सारे सुरों में समायी है मां तेरे ही मीठे स्वर।
गाते हैं गीत ठुमक ठुमक के इस डाल से उस डाल पे करते हुये कलख पंक्षी
छेड़ती है संगीत नदियों की धारा, पवन के झूलों के संग बांधते हुये समां।
कैसे कहूँ माँ तुझसे है दूर, जब नजर आये हर पल में प्रेम भरी तसवीर तेरी।
सारी कमियों को जानते हुये मां तू संवारे संसार के पुत्रों को अनजान बनते हुये।


- डॉ.संतोष सिंह