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Hymn No. 2567 | Date: 04-May-2002
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हे जगतजननी जगदम्बेड़, सिध्द अम्बे.., हे जगतजननी जगदम्बेड़,
हे जगतजननी जगदम्बेड़, सिध्द अम्बे.., हे जगतजननी जगदम्बेड़,
सिध्द अम्बे..।
तेरे दर से गया न कोई निराश, रखी हो चाहे जो भी आस।
दास है हम तेरे सदियों से, कहेंगे न तुझसे तो किससे कहेंगे।
ललक है बहुत दिल में, क्या न करके मिल जाये तू हमको।
दुनियावी फेरे में पड़ा हूं, इन फेरों को कौन सुलझाये तेरे बिना।
मांग तुझसे अनेकोनेक है, सर्वोपरि उनमें से तू एक है।
खा रहा हूँ थपेड़े अपने कर्मो के, गुहार लगा रहा हूँ मन के छोड़ों से।
उंगली न उठने पाये किसीकी, उससे पहले तू कर दे सब खुशी से।
माँ मेरे पास न है कुछ मेरा, जो तेरे जी में आये वो तू कर दे।
देने को तो न है कुछ पास मेरे, सुरावली सजे गीत भी तो है तेरे।
मां अब न कर तू देर, ला दे मेरे जिंदगी में सवेरा।
- डॉ.संतोष सिंह
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