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Hymn No. 2562 | Date: 01-Apr-2002
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सुन लो, सुन लो, सुनो, सुनाता हूँ रोज रोज तुमको दिल की बात अपने।
सुन लो, सुन लो, सुनो, सुनाता हूँ रोज रोज तुमको दिल की बात अपने।
बता दो, बता दो, बता दो, वो राज जिससे अहसास हो जाये तुम सुनते हो दिल की बात।
ख्याल हो या ख्वाबों की डोर पकड़के पहुँचना चाहते है हर वख्त तुम्हारे पास।
टोकता है कोई कितना भी, रोके रुक सकता नही हूँ अपने आपको पहुँचता हूँ जो तेरे पास।
कई बार समझाया, समझौता कर लूँ हालातों से बद से बदतर हालात में तेरे पास पहुँचा।
अब न रहा कुछ मेरे हाथो में, मुलाकात दर मुलाकात कर नही पाता हूँ दिल की बातों को।
बस गयी है मन में एक ही बात, कैसे भी करके रह जाउँगा अब तेरे पास।
दास बनके भी रहा पास तेरे, तो तुने पूरी कर दिया मूंहमांगी मेरे दिल की।


- डॉ.संतोष सिंह