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Hymn No. 2569 | Date: 15-May-2002
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प्रभु तेरे बोये प्यार के बीज को, मुरझाने न दूंगा।
प्रभु तेरे बोये प्यार के बीज को, मुरझाने न दूंगा।
अर्पित करुँगा श्रध्दा की खाद, सीचूंगा दिल की अतुल गहराइयों से।
चाक-चौंपन्द रहके सेवा करुँगा, किंचित लापरवाहीयों को न आने दूंगा।
मन की सच्ची हवाओं का बहाऊँगा अनुपम झोंका।
लहलहा उठेगा दिल तेरा, जो भर दूंगा प्यार की खुशियों को उनमें।
जतन करुँगा पल पल, आंखो से ओझल न होने दूंगा कर्तव्य को।
मिसाल कायम करुँगा, जो दीया है बेमिशाल कृपा तूने हमको।
कहने की जरूरत न होगी, अब जो जोड़ लिया तेरे दिल को दिल से।
कल को त्याग के आज का आज का मंत्र जपूंगा निष्ठ ओर सतत भावों से।
आने वाली हर कठिनाइयों में मुस्कराके तेरा नाम लेते बढ़ता जाऊँगा विश्वास से।


- डॉ.संतोष सिंह