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Hymn No. 2570 | Date: 17-May-2002
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मैं क्या कहूं, जब कोई सुनने जानने की इच्छा न रखे हो दिलों में।
मैं क्या कहूं, जब कोई सुनने जानने की इच्छा न रखे हो दिलों में।
मैं किससे कहूं, जब कोई निकलना न चाहे दुनियावी दौर से।
मैं कैसे कहूं, जब कोई बावलापन न दिखाये प्यार करने का।
मैं क्यों कहूँ, जब कोई सिरफिरा तैयार न हो कुछ कर जाने को।
मैं मैं की बात क्यों सोचूँ जब अंतर में न हो शोर किसी मैं मैं का।
मैं किससे क्यों कहने जाऊँ, जब हर पल सुनने सुनाने को तैयार बैठा हो।
मैं से मैं क्यों भागूं, जब मय में छुपा हो दुनिया के सारे राज।
मैं क्यों कुछ करने जाऊँ, करेगा वो सब कुछ बनके निहम, निकालके मैं का दम।


- डॉ.संतोष सिंह