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Hymn No. 2572 | Date: 19-May-2002
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आया हूँ, आया हूँ, आया हूँ तेरे पास, गीतों की लड़ियों में शब्दों के फूल सजाके।
आया हूँ, आया हूँ, आया हूँ तेरे पास, गीतों की लड़ियों में शब्दों के फूल सजाके।
पिरोया हूँ सुरों के संग दिल से बहते निर्झर स्वर लहरियों में डूबके।
न जाने कितने तरह के वाद्य दे रहे है संगीत, तेरे दिल को जीत लेने के लिये।
रचाया है बिन जाने समझे, जो पड़ गयी अनायास तेरे नजरों के प्रेम फुहार हसपे।
कर उठा है झंकार रोम-रोम मेरा, तुझे अपने सामने पाके, सुना दूं न जाने क्या आज तुझे।
बस में न है कुछ मेरे, छायी हुयी है न जाने कैसी मदहोशी, जो होश में न आने दे।
गुजर रहा है बिन गुजारे पल, पल भर का अहसास न छोड़ते हुये हमारे मन पे।
टकटकी लगाये हुये देख रहा हूँ तुझ, अस्थिर होंठ कब देंगे साथ मेरे सुरों को।
बोल मिल न रहे है, निर्झर आनंद के बोलों में बदलके समेट दूँ न कही थोड़े से अर्थों में।
ये तो अनुभूती की बात है, जो चुपचाप तुझसे निकलके समायी रही है मेरे दिल में।
- डॉ.संतोष सिंह
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