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Hymn No. 2575 | Date: 22-May-2002
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मोहना है तो मोह ले मुझे तेरी मोहनी सुरतिया।
मोहना है तो मोह ले मुझे तेरी मोहनी सुरतिया।
हरना है तो हर ले मेरे दिल को तेरी नजरिया।
मन को लुभाना है तो लुभा ले तेरी अनोखी अदाये।
जी को चुराना है तो चुरा ले तेरी मोहक मुस्कान।
रोम रोम रोमांचित होता रहे करीब महसूस करके तुझे।
ढालना है तो ढाल दे अंतर को मोरे अनुरूप तोरे।
संवारना है तो संवार दे मेरे जिंदगी को तू अपना बनाके।
बरसना है तो बरस जा तू प्यार की बूंद बनके तोरे दिल पे।
समरूपता देनी है तो दे दें समायी तन मन के परे जो है स्व तेरी।


- डॉ.संतोष सिंह