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Hymn No. 2576 | Date: 22-May-2002
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मां मैं न कहता हूँ मेरी कमियाँ रोके हुये है राह मेरी।
मां मैं न कहता हूँ मेरी कमियाँ रोके हुये है राह मेरी।
कदम दर कदम जो आगे बढ़ता हूँ, आ आके खड़ी होती है सामने मोरे।
कई बार चाहा मन को बहला फुसला के हो जाऊँ पार उस राह से।
न जाने किस जन्म की है खार, कि राह बदलके बदल न पाता हूं खूद को।
कई बार कहा सच्चे दिल से तुझको, तू देखके जानके क्यों खड़ा है मौन।
तेरे बिन तारे तर न पाऊंगा, मजबूर करूँ मां मैं केसे तुझको इतना ज्यादा।
ऐसा कौन सा कडुवाहट है दिल में, जो तेरे पास रहके अब तक हूँ अधूरा।
गुरूजी ने भी मुख मोड़ा, फिर भी हमने हालातों का रोना नहीं छोड़ा।
भागता रहा हूँ अब तक, अपनी जंग बिन लड़े हथियार डालता रहा हूं।
सालती है मुझे तेरी पीड़ा, जब जब व्यथित होता है दिल मेरा।


- डॉ.संतोष सिंह