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Hymn No. 2579 | Date: 28-May-2002
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रोके न रूक पाउँगा, बिन कहे प्रभु तेरे पास जो मैं आऊंगा।
रोके न रूक पाउँगा, बिन कहे प्रभु तेरे पास जो मैं आऊंगा।
मचलते हुये मन को, दिल से निकलती धूनों पे नचाऊंगा
रूखसत करेगा तू कितना भी, दर पे तेरे दस्तक देते जाऊंगा।
अंतर से उपजते गीतों को सुनाके, तेरे दिल को जीत जाऊंगा।
दास हूँ तेरा तो क्या से, मालिक जी भरके मोहब्बत तुझसे करते जाऊंगा।
कहने को कुछ भी कहे दुनिया, तेरे अंदाज में जिंदगी जीता जाऊँगा।
तुम्ही हो जिंदगी का कोई भी, हंसते हुये ही तेरे पास में आऊँगा।
जो सोचा ना है मैंने, वो भी तेरे प्यार में कर दिखाऊंगा।
अंजाम चाहे जो भी हो, तेरे प्यार का जाम हम पीते जाऊंगा।
एक बार तू भी कर उठेगा वाह-वाह, जो खुदके कंधो पे सवार होके आऊंगा।
लिखी लिखा होगा बहुतों का मुकद्दर, जो बना होगा वो लिखने को मजबूर कर जाऊंगा।


- डॉ.संतोष सिंह