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Hymn No. 2581 | Date: 01-Jun-2002
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हे माँ, हें माँ, मदद कर तू मेरी, असहाय हो रहा हूँ मन के आगे।
हे माँ, हें माँ, मदद कर तू मेरी, असहाय हो रहा हूँ मन के आगे।
इक बार नहीं कई कई बार निकलना चाहा, पर सवालिया निशां खड़ा है जिंदगी में।
दशा बदल गयी है दुर्दशा में, फिर भी समझौता करने को ना तैयार हूँ।
आस है दिल में, आज नहीं तो कल मदद आयेगी जरूर तेरी ओर से।
झूठी है या कितनी सच्ची, पर पुरा विश्वास है इस मनचले दिल को।
जिल्लत उठायी न जाने कितनी जिंदगी में, पर शर्मिंदगी न खायी अपने मन में।
दुनिया ओर कर्म जो बुन गये है इक ताने बाने से, जो खेल खेलते हैं मुझसे।
हंसी आती है जानके सब कुछ, कब तक अनजान तू बनाता रहेगा हम सबसे।
फरियाद न करता हूँ, दिल में इक बार दिल से तुझे सिर्फ याद करता हूँ।
अंत कर दे तू मेरे मन को, तेरे महामन में, अंत हो जायेगा मन की सारी व्यथा का।


- डॉ.संतोष सिंह