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Hymn No. 2591 | Date: 27-Jun-2002
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आया था चुराने तेरे दिल को, खुद ही खों गया तेरी बनायी दुनिया में।
आया था चुराने तेरे दिल को, खुद ही खों गया तेरी बनायी दुनिया में।
खोते खोते जला जो दीप यादों का, एक ही पल में सब कुछ याद आ गया।
लगा पछताने मन ही मन में, तेरे रहते करम मैने ऐसा।
बेवफाओं की कतार में कैसे न पहुँचा होश में होते हुये होश को क्यों गुमाया।
जोश था जो शुरू में, उसमें किन करमों ने फेरा पानी तेरे रहते।
जो हो गया उसका रोना नहीं, पर अब प्यार की दुनिया में मुझको सोना नहीं।
मालिक तेरी मालिकी के आगे चलती नहीं किसीकी, दिन बदलते देर लगती नहीं दुनिया में।
सोचा भी नहीं जो वो कर गया हूँ, जो सोचा नहीं वो कर दिखाऊंगा समय होते।


- डॉ.संतोष सिंह