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Hymn No. 2593 | Date: 29-Jun-2002
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पार पाना है हर हालातों को, बीते हुये को भुलाके जीत लेना है जिंदगी को।
पार पाना है हर हालातों को, बीते हुये को भुलाके जीत लेना है जिंदगी को।
लाख उलझने आयी होंगी, हंसते हंसते अब तो गुजर जाना है जन्मों जन्म के करमों से।
क्या खोया क्या पाया इससे उपर उठकर, छूटी हुयी श्वासों को फाडके जी लेना है जिंदगी को।
मतलब हो लाख फिर भी मतलब ना रखना है किसीसे, नया राज सीखना है जिंदगी जीने का।
तसव्वूर न हो जीवन में तो क्या से, तसव्वूर को बसाना है सदा के लिये दिल में।
द्यायत हूआ होगा लाख तन मन, दुखों की परवाह न करते हुये सुकुन से जी लेना है जिंदगी को।
बिगड़ती हुयी बातें बने या ना बने, परवाह ना करते हुये जी जान लगा देना है जिंदगी में।
कोई कहे चाहे कुछ भी, ध्यान न देते हुये ध्यान में उतर जान है जिंदगी में।
हारे हुये है खेल का पांसा पलट देना है, मुस्कुराते हुये जिंदगी अजीबों गरीब दौर में।
बनके बिगड़ा है सब कुछ सदा, इक बार जो बन जायेगा रब का बिगड़ती जिंदगी बन जायेगी सदा।


- डॉ.संतोष सिंह