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Hymn No. 2594 | Date: 29-Jun-2002
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मेरे पास कहा है कुछ, जो कुछ है दिया हुआ तेरा।
मेरे पास कहा है कुछ, जो कुछ है दिया हुआ तेरा।
मन में है इक विश्वास, जीत लूंगा हारी हुयी जिंदगी को।
दोजख में बहुत जी लिया, अब तो जीना है बंदगी करते तेरी।
गिरा हूंगा कई बार, पर उठके हर बार तेरी ओर चला हूँ।
झटका लगा है जोर का, जोर न होने दूंगा कम जिंदगी में।
उमगो पे पानी फेरा, पर अब अरमानों को तेरे पूरा करुँगा।
मन की कारस्तानी बहुत हो गयी, अब तो दिल का काज करुँगा।
राज जो कायम हुआ रोम रोम में तेरा, तो तेरे दिल की बात कहूंगा।
संवाद जो कायम हुआ दिल से दिल का तो दिल की बात करुँगा।
बन के तेरा अभिन्न हिस्सा, जिंदगी के हर दौर में मस्ती का गीत गाऊंगा।


- डॉ.संतोष सिंह