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Hymn No. 2596 | Date: 03-Jul-2002
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प्यार की दुनिया से आया हूँ, यारों के यार को हम सबको प्यार करने वास्ते।
प्यार की दुनिया से आया हूँ, यारों के यार को हम सबको प्यार करने वास्ते।
मुझे मतलब न है किसीसे, इश्क न करो ऐ दूनियावालो मेरी जिंदगी से।
इंसान के रुप में आया है वो फरिश्ता, जिसने बनाया हम सबसे रिश्ता।
क्या न किया हम सबके वास्ते, बातों ही बातों में जीवन जीने का अंदाज बताया।
सताया फिर भी न जाने उसको कितना, मिलते ही मुस्कुराके उसने पास बुलाया।
जालिम थे न जाने हम कितने, अपने दूखों को वे गले लगाते देख उसको न शरमाये।
अंदाज था उसका प्यार करने का हंसी, उतारे उतरते नहीं इन काले शब्दों में।
हम मतलबियो के बीच, बेमतलब बाँट रहा अपना अनमोल प्यार वो सदा।
अदा कर नहीं सकते उसके प्यार के एवज में कर दें चाहे खुदको कई बार कुर्बान उसपे।
दरबार में थे एक से एक अनमोल हीरे उसके, फिर भी रखा इस बेमोल को सदा साथ अपने।


- डॉ.संतोष सिंह