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Hymn No. 2598 | Date: 11-Jul-2002
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जिंदगी के हर मोड़ पे सितमगर ने सितम बहुत ढाया, मुस्कुराते मुस्कुराते रोना आ ही गया।
जिंदगी के हर मोड़ पे सितमगर ने सितम बहुत ढाया, मुस्कुराते मुस्कुराते रोना आ ही गया।
बेगानों के किये का कोई गम न था, अपनो के किये पे रोना आ ही गया।
मन को लाख समझाया, जो मन तूने है लगाया, तो हो जाये कुछ पर ना भरमाना मन को।
किया है प्यार तो भुगतना होगा हर नाजों अंदाज को, बना जो जो तू अपनी किस्मत का बादशाह।
जब माना है तूने जो होता आया है वो अच्छे के सिवाय होता न है कुछ तो रोना किस बात का।
कहर कितना भी कोई ढाए, वख्त तो अच्छा हो या बुरा, उसको तो गुजरना है आज नहीं तो कल।
सालेगा कितना भी कुछ, करेगा हलाल तू दिल को अपने, भूल जा जिंदगी के उलफत भरे पलो को।
जो बातें बनती नहीं है तो छोड़ दे, पूरा का पूरा जोर लगा के उपर वाले के हाथों में।
इक बार जो सीख जायेगा, जिंदगी में रोना भुलाके जिंदगी को जीना तू सीखा जायेगा।
रोये कोई ओर अब मैं रोने वाला नहीं, बहुत रो लिया जिंदगी में अब मैं रोने वाला नहीं।


- डॉ.संतोष सिंह