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Hymn No. 2599 | Date: 11-Jul-2002
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मैने चाहा था मिल जाये साथ किसी का, उसने ना रखने दिया हाथ किसीका।
मैने चाहा था मिल जाये साथ किसी का, उसने ना रखने दिया हाथ किसीका।
मैंने मरना चाहा था जिंदगी को जीते जीते, उसने मरने भी ना दिया।
लाख दी कसमें पूरा करने के लिये सपने, कसमों की भी दाल गलने ना दिया।
बड़ी अजीब बात थी, शुरूआती दौर में हमने कहा था ना होने देना कमजोर हालातों के आगे।
कमजोर पलों में कितना भी गिड़गिड़ाऊँ, उचित ना लगे तो पूरा ना करना मेरी बाते।
जिंदगी को जीना है तेरे अंदाज में, उससे पहले कसम से तू मरने भी ना देना।
बदलते हालातों में बदल गये जो हम, पर ना बदलके रख लेना तू दिल की सच्ची बातें।
हँसता था जग सारा पर छिछली बातें होने ना दिया, जो चाहा था उसको पूरा कर दिया।
तब जो ना समझे थे अब जाके है समझे, जिंदगी और मौत के भेद को जो मिटते पाया।
तन के पिंजड़े से निकल के, आत्मा के पक्षी को जो उन्मुक्त होके परमात्मा में विचरते पाया।


- डॉ.संतोष सिंह