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Hymn No. 2602 | Date: 03-Aug-2002
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रहा न अब हमारे हाथों में, छोड़के जाना दिलबर तुमको।
रहा न अब हमारे हाथों में, छोड़के जाना दिलबर तुमको।
तुम चाहे तो दुत्कार देना, फिर भी आयेगे तेरे पीछे पीछे हम।
जब तक ये दिल है, हर अंदाज ये तेरे निगाह रखेगे हम।
सरोकार ना है देर करने से, डरता हूँ तुझसे दूर होने से।
छोड़ा न है कोई सितम, बेमुरव्वत होके जो ढाया है तूझपे।
अपनी हालत का जिम्मेदार हूँ, ना दोष देता हूँ औरों को।
औंकात ना थी बचकाने पन में, कर गया जुर्रत उससे भी ज्यादा।
तू भी सोचता होगा, क्या सोचा था ओर क्या निकला।
कसम से तेरे अंदाज से ज्यादा, हम बेवफा निकले।
बेशर्म हूँ इतना, ऐ खुदा चूकता नहीं अब भी तेरे प्यार की कसम खाने से।


- डॉ.संतोष सिंह