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Hymn No. 2603 | Date: 03-Aug-2002
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मुस्कुराना तो दूर उलफत भी ना है, हमारे वास्ते उनकी नजरों में।
मुस्कुराना तो दूर उलफत भी ना है, हमारे वास्ते उनकी नजरों में।
गफलत में जो थे हम, उनके अंदाज को प्यार समझ बैठे।
वो पहले से प्रेमियों के थे, हम जैसों से न जाने कैसे टकरा गये।
मुस्कुराके निकलना चाहा, मुस्कुराहट को जो हम प्यार समझ बैठे।
तरस आता था उनको बेचारगी पे मेरी, जो जान न था प्यार के उसूल को।
मन रखने वास्ते बुलाते थे पास अपने, हम तो लायक न थे ख्वाबों के उनके।
कहर तो उस दिन गिरा, जहर से भरी जिंदगी का जहर जो उन्होंने पीया।
ये सोचके दो बूंद अमृत का पाके, बदल जायेगी जिंदगी प्रेमियों में।
न कुछ हूआ ऐसा, हम तो थे वैसे, परछाई से डरने लगे ना वो पड़े किसीपे।
खुदा में जरूर बनाया हुआ हूँ तेरा, पर ना हुआ हूँ तेरी जमात का।


- डॉ.संतोष सिंह