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Hymn No. 2604 | Date: 03-Aug-2002
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चलो चले कहीं दूर जहां ना हो कोई, कोई से मतलब ना ख्वाब न ख्याल ना ही खाकसार।
चलो चले कहीं दूर जहां ना हो कोई, कोई से मतलब ना ख्वाब न ख्याल ना ही खाकसार।
करे इक दूजे पे प्यार की बरसात, इसके सिवाय ना हो कोई और इजहार।
ना कोई रस्म हो, ना कोई कस्म हो, जो भी हो बस प्यार ही प्यार हो।
ना कोई सोच हो, ना कोई विचार, दिलों को फुरसत ना हो प्यार से।
जहाँ तक और सुनाने कि ना कोई फिकर हो, प्यार के सिवाय ना कोई जिकर हो।
दिल से उठती हुयी तरंगे करे उमंगो की बरसात, चाहे जड़ हो या चेतन।
तरस मिटती जाये दिल की पर बुझने न पाये, पीने के बाद और पीते जायें।
कोई ओर से ना कोई ओर गुंजाइश रहे, प्यार के सिवाय कोई ना जीवन में फरमाइश रहे।


- डॉ.संतोष सिंह