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Hymn No. 2606 | Date: 26-Aug-2002
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मारे मारे न जाने कब से तू मेरे दिल को मारे।
मारे मारे न जाने कब से तू मेरे दिल को मारे।
कभी आंसुओं के कोड़s से तो कभी प्यार के रेशम से।
हर वार करता जाये धा कभी मन पे तो कभी दिल पे।
दर्द को मेरे देखके, दूर से बैठे बैठे तू खूब मुस्कुराये।
कमजोर है बंदा तेरा, जो ख्वाबों को देखते देखते तुझको भूल जाये।
सुबह की किरन देहरी पे जो आये, तो तेरी याँदो का खुशनुमा झोका के लाये।
सताने में तेरे सुकुन पाये मन मेरा, छू लेना चांहू दिल के उजालो में।
महीने दर महीने गुजरते जाये पास होके न जाने तू क्यों न आये।
जबसे विरह का दौर चला, तब से दिल को अच्छा ना लगे।
तेरे रहते हम हैं यार कसम से, मर जायेगे तेरे बिन जैसे मीन बिन पानी के।


- डॉ.संतोष सिंह