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Hymn No. 2607 | Date: 26-Aug-2002
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इक बार और करीब आ जाओ दिल के, कसम से न जाने पाओगे मुख मोड़के।
इक बार और करीब आ जाओ दिल के, कसम से न जाने पाओगे मुख मोड़के।
रोम-रोम घिर उठेगा उमगो से, जो बरसात होगी प्यार से भरे तरंगो की।
पढेंगे कसीदे नये नये प्यार के, जो चूर होगा दिल पीने में यार के हाथों से।
होश उड़ने का डर ना दिखाना अब, तेरे साथ रहते कौन रहना चाहे होश में।
मनायेगे जश्न तेरे आने का, तेरे सोहबत में रहके तेरा हमदम बन जाने का।
अब दिल को कोई और डर न होगा, जब अंतर के कोने कोने में तू ही तू होगा।
ये दिल की बात है, जो विरह के अंधियारी गलियों से खींच लायेगा तुझे जरूर।
कदम हर दौर में थिरकेंगे लय में, जो बजती रहेगी धुन प्यार की दिल में।
मन ही मन गुनगुनाता जाऊंगा प्यार के नये नये गीत, लबरेज होके आनंद से।
खिल खिलता जायेगा मेरी आत्मा, जब परमात्मा तुझमें मिलके।


- डॉ.संतोष सिंह