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Hymn No. 2611 | Date: 30-Aug-2002
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पुंकार मची है तेरे नाम की, कि अब तक तू दूर है क्यों मुझसे।
पुंकार मची है तेरे नाम की, कि अब तक तू दूर है क्यों मुझसे।
दिल बेचारा तब धीरे से बोले, कि जिसे तू दूर समझे वो करे इंतजार दिल में तेरे
हाय तौंबा मचाने से पहले, झांक लिया होता तू तो दिल में।
पारी नहीं आती आज में, प्यार से मिलने को वो जो खड़ा है कबसे।
बताना सच सच तुमने कितना निभाया है, दिल कहा कितना माना है।
क्यों बंद कर रखा था दिल के दरवाजे को, झांक के क्यों नहीं देखा हाल उसका
देते जा रहा है न जाने दोष कितना, अपने कर्मों की गहरी को एक बार देख लो।
उसको उठाये मुस्कराते चुपचाप वो खड़ा हैं, किस्मत को पल पल बदलते जा रहा है।
आगाह बहुत किया था, पर तू जो ना सुनने पे अड़ा था, तो अब क्यों रोये।
गुजरते हुये पलो को थामने के बदले, जिंदगी का रुख मोड़ ले नाम लेके उसका।


- डॉ.संतोष सिंह