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Hymn No. 2614 | Date: 24-Aug-2002
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मां क्यों नही मेरे सुर धड़का दे रहे है तेरे दिल को।
मां क्यों नही मेरे सुर धड़का दे रहे है तेरे दिल को।
क्या ऐसी है मजबूरी, जो बनी हुयी आज तक ये दूरी।
ख्यालों का सफर क्यों खत्म हो जाता है जिंदगी के हकीकत में।
ख्वाबों से मूक होके तू क्यों सिमट गयी है तस्वीरों में।
गुरू की न बात मानके, मिलना चाहा तुझसे मिल न सका।
कैसे पूरा होता, जब कथनी और करनी में भद था मेरे इतना।
उल्फतों के जोर में गफलत भरी जिंदगी जीते चले गये।
चाहके भी उबर न पाये, जो चाहने में न थी सच्चाई हमारे।
निकले कैसे दिल से वो रुबाई, जो तड़पा जाये तेरे मन को।


- डॉ.संतोष सिंह