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Hymn No. 2615 | Date: 29-Sep-2002
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गुनगुनाये दिल बार बार, आतुर है लब्ज मेरे गाने को गीत तेरे।
गुनगुनाये दिल बार बार, आतुर है लब्ज मेरे गाने को गीत तेरे।
फड़फड़ के रह जाऊँ मैं, जुबाँ पे जो अस्पष्ट बोल बदल न पाये गीतों में।
अभी कौन सी कमी बाकी है, जो आधी अधूरी है दिल की बातें।
सताये रह रहके तेरी यादें चाहके सुन न पाऊँ तेरे मन की बातें।
गुजरने को गुजरता जाये जीवन सारा, पर लगे ना तेरे सिवाय कुछ प्यारा।
मस्ती में भी ना रही वो बात, जो चुपके से दिला जाये तेरी याद।
सूनी आँखो से गुजारे हुये लम्हों को टुकड़े टुकड़े में देखके खूश होता।
अपने आपको कई बार टटोलता हूँ, कि ऐसा क्या कर दूं कि तू आ जाये पास।
रास न आये तेरे बिना कुछ, कैसे बताऊँ तड़प तुझको मैं अपनी।
क्यों ओढ़ ली तूने इतनी चुप्पी, अंत क्यों न कर पाऊँ तेरी चुप्पी का।


- डॉ.संतोष सिंह