My Divine
Home
Bhajan
Quotes
About Author
Contact Us
Login
|
Sign Up
ENGLISH
HINDI
GUJARATI
My Divine Blessing
VIEW HYMN
Hymn No. 2617 | Date: 06-Oct-2002
Text Size
मग्न हृद्य है, कर्मों की गहरी खाई, तेरे सिवाय कौन पार लगाये इस बुझी हुयी जिंदगी को।
मग्न हृद्य है, कर्मों की गहरी खाई, तेरे सिवाय कौन पार लगाये इस बुझी हुयी जिंदगी को।
लोग हंसते है, मेरी नासमझी पे, परवाह किये बगैर तेरी चाहत को ही दोहराऊ।
तार तार होते जा रही है हर पल जिंदगी, दे ना सका कोई खुशी मां बाप हो या बीवी बच्चो।
सफर करने को तो मैं करू, करना पड़े क्यों उनको, फिर भी तेरी ख्वाहिश को छोड़ ना पाये मेरा दिल।
दोष ना है इसमें कोई तेरा, प्रारब्ध है जो ये मेरा, फिर क्यों ना करे पुरी इस अनाथ के दिल के कहा के।
जलता हूँ अपनी लगायी आग में, ख़ाक बदल न पाये मेरे भाग्य को, कि लिख दे फिर से नया भाग्य तू मेरा।
पछतावा बहुत है अपने किये हुये का, उससे भी ज्यादा तेरे साथ रहके तुझसे दूर रहने का क्या कोई नही ईलाज है।
बना बैंठा हूँ जालिम अपनी ही किस्मत का, सचेत कर तू दूसरे पल अचत्sा हो जाऊँ संसार में।
जान तुझसे सब कुछ, पहचानना आया भी बहुत कुछ, उतारे ना उतरा अब तक कथनी ओर करनी को बदल s तू मेरी जिंदगी को।
- डॉ.संतोष सिंह
Previous
जिंदगी में आये लहर एक के बाद एक, रुकने का नाम न लें।
Next
माना मेरे आसुंओं का कोई मेल नही, न ही मेरे बोल का कोई तोल।
*
*