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Hymn No. 2620 | Date: 06-Oct-2002
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आ जाओ मेरे पास तुम बनके मेरी श्वास, उतर जाओ इतने गहरे में मिट जाये मेरी पहचान।
आ जाओ मेरे पास तुम बनके मेरी श्वास, उतर जाओ इतने गहरे में मिट जाये मेरी पहचान।
आस कि कोई बात न हो तो न होंगे निराश, जो हो बस साकार हो नजरो के चारों ओर।
विश्वास का दामन छूटे उससे पहले तुम थाम लेना हमको कृपा के हाथों से।
अपने वश में न था कभी कुछ तेरे वश में रहेगे बनके बुत, मिट जायेगा भेद हमारे मन का।
टूट जाये मन की सारी दीवारें, तो खत्म हो जायेगी हमारे प्यार की सारी रुकावट।
तसव्वुर हो इतना तेरे प्यार का, हिला न सके मुझको जमाने भर की आंधियाँ।
मांग तो मेरी सदा से एक है, कुछ भी करके तेरा होके रहना, उन मांगो का क्या करना जो दूर ले जाये तुझसे।
बड़ी मुश्किल है चाहत को पा लेना, पर उससे भी ज्यादा दूर रहके प्यार के धर्म को निभाना।
सारी समस्याओं की जड़ तो मन है, पर उसी मन से विरह में तेरा याद है आती ।


- डॉ.संतोष सिंह