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Hymn No. 2621 | Date: 16-Oct-2001
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गुरू की बात उतर जाये जो दिल में, तो स्वतःबह उठेगी कर्मों में।
गुरू की बात उतर जाये जो दिल में, तो स्वतःबह उठेगी कर्मों में।
कहने पूछने का मायने न होगा तब जब, दिखायी देगी छवि जो नजरों में पल पल।
समय का अहसास न होगा कोई, श्वासों में जो महक फूटेगी प्यार भरी।
बदल जायेगी नजर जो जमाने की, रोम रोम से उमगो भरी जो बरसात होगी।
हो जायेगा अंत सारी मन की दुविधाओं का, हर पल बनना बिगड़ना होगा जो इशारे पे उसके।
कुछ भी हो जीवन में रहेगा हर पल दिल में वो, गुरू के दिल में पल पल स्थिर होगा तू।
बदल बदलके के क्या बदलेगा, उम्र का बदलना जो होगा न मायने तेरे लिये कभी।
अपने पराये नजर आयेंगे सारे एकसे व्यवहार की दुनिया में व्यवहार जो चुपचाप तू निभायेगी।
हर पल बरसेगी अनुपम कृपा गुरू की, समस्त सिध्दियाँ विराजेंगी तेरे अंतर मन में।
तन से अलग होगा तू परम् सद्गुरू देव से, पर रोम रोम में साम्राज्य होगा उसका।
- डॉ.संतोष सिंह
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है मां, हे मां..., हे ... मां, हे मां..., हे मां...।
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