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Hymn No. 2623 | Date: 27-Oct-2001
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कोई मायने न है शब्दों के, अगर प्यार हो सच्चा।
कोई मायने न है शब्दों के, अगर प्यार हो सच्चा।
मौन में मुखरित होता है, ओर दिल में पनाह लेता है।
भाषा है इसकी बड़ी सजीव, नजरों से सुनी ओर कही जाती है।
करना चाहो तो कर न पाओगे, ये तो बस हो जाती है।
रहता नही होने पे ओर कभी आपे में, ये तो बस प्यार ही प्यार की सोंचता है।
विरह हो या मिलन, सुकूँ मिलता है मिलने ओर तड़पने पे।
अच्छा बुरा लगता नहीं किसीका, वो तो बस प्यार में ही जीता है।
चलता रहता है दौर प्यार का, न जाने कितना वख्त गुजार जाता है प्यार में।
जीवन देखते देखते गुजर जाता है प्यार को प्यार भरी नजरों से देखने में।
प्यार के पीछे जो रहता है तैयार मरने ओर जीने को।


- डॉ.संतोष सिंह