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Hymn No. 2624 | Date: 11-Nov-2001
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न जाने वो कौन सी धारा है, जो मुझको तुझसे जोड़ती है।
न जाने वो कौन सी धारा है, जो मुझको तुझसे जोड़ती है।
न जाने वो कौन सी बात है, जो मुझको तेरी याद दिलाती है।
न जानें वो कैसा अहसास है, जो बरबस मुझको तेरी ओर खींच ले जाती है।
न जाने वो कैसा सकून है, जो तेरे पास पहुंचके दिल को मिलता है।
न जाने वो कौन सी शांति है, जो बेचैन मन को चैन मिलता है तेरा नाम लेके।
न जाने वो कौन सा मार्ग है, जिसपे चलते शुरू हो जाता है मस्ती का दौर।
न जाने वो कौन सा पल है, जिनके चलते तू बदल देता है ख्वाबों को हकीकत में।
न जाने वो कौन सी दास्ताँ है, जो आज रखे हुये है तुझसे वास्ता।
न जो वो ऐसा क्या करना है, जो आज हमको तू सिखाये जा रहा है।
न जाने वो पल कब आयेगा, जब हम दिलो जान से रंग भर देंगे तेरे ख्वाबों में।


- डॉ.संतोष सिंह