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Hymn No. 2626 | Date: 16-Nov-2002
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मेरे लिये प्रभु तूने क्या न किया, जो न था किस्मत में वो भी दिया।
मेरे लिये प्रभु तूने क्या न किया, जो न था किस्मत में वो भी दिया।
दानत तेरे देने की इतनी थी, हमारी लायकी न होने पे फिर भी तूने दिया।
एक बार नही कई कई बार दिया, सहेज सहेज के सहेजना जो न आया हमको।
देने का सिलसिला तूने न रुकने दिया, पर लेने का अंदाज अब तक सीख न पाये।
खेल खेला था हमने अपने आप से, उसके सिला में पास कुछ ना रुक पाया।
लाख बदलना चाहा बदलते बदलते न जाने कब अपने आपको बिखरते पाया।
किसी को एक मिला, मुझको तो तूने सौंप दी सारी की सारी विरासत।
विरासत को पाके बहुत चकराया, पर उस विरासत का उपयोग करना हमको न आया।
हैरान थे हम अपने आप में, प्रभु जो तेरे पास रहके जी न सके तेरे अंदाज को।
लोग तो तरसते है ओर हम बुझा न सके सरोवर के पास रहके अपनी प्यास को।


- डॉ.संतोष सिंह