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Hymn No. 2627 | Date: 26-Nov-2002
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ओड़ गोरे गोरे, ओड़ गोरे गोरे डाल दे तू डोरे दिल पे हमारे।
ओड़ गोरे गोरे, ओड़ गोरे गोरे डाल दे तू डोरे दिल पे हमारे।
काहे किसीसे कुछ कहूंगा, चुपके से दिल की बतियाँ तुझसे कहूंगा।
बची हुयी है अब तक जो दूरी, खत्म कर दे तू उस मजबूरी को।
रहे न मन में अब कोई लाज, गिरे चाहे जमाने कि चाहे कितनी भी गाज।
जान जाये चाहे दिल का राज जमाना सारा, तो क्या ओं गोरे .....।
बनी न अब तक कोई बात हो गया हूँ मैं जो तेरी ही जात का।
गत जो बने तन की, पर दुर्गत न होने दे तू मेरे दिल की।
बड़ी मुश्किल से पाया, खोऊँ उससे पहले हो जाने दे तेरा।
जी भरता नहीं पल दो पल से, अब तो रहना चाहूँ हर पल संग तेरे।
ओ गोरे... ओ गोरे कर दे पूरी मन की मुराद जो हो गया है जरूरी।


- डॉ.संतोष सिंह