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Hymn No. 2628 | Date: 28-Nov-2001
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न जाने अभी कितनी बातें कहना तुझसे बाकी है,
न जाने अभी कितनी बातें कहना तुझसे बाकी है,
सॉकी तेरे लबों से छुआ हुआ, न जाने कितना घूंट पीना बाकी है।
न जाने अभी कितनी प्यार की रस्म निभाना बाकी है,
सॉकी तेरे प्यार में दिवानगी की हद्दों को छूना बाकी है।
न जाने अभी कितनी तेरे ख्वाबों को पूरा करना बाकी है,
साकी तेरे प्यार में मदहोश रहना हर पल बाकी है।
न जाने अभी कितना तेरे प्यार में तड़पना बाकी हे,
साकी पल पल तेरे यादों में विरह के गीत गाना बाकी है।
न जाने अभी कितनी देर है प्यार के परमद्व हद्द को पाने में।
साकी तेरा होके सारे भेदों को तन मन से मिटाना बाकी है।


- डॉ.संतोष सिंह