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Hymn No. 2629 | Date: 28-Nov-2001
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खिला खिला मन करता है, खिली खिली बातें,
खिला खिला मन करता है, खिली खिली बातें,
जो अपने आप में रहता है, वो ही दूसरों को समझता है।
पुरूषार्थ की राहों पे चलने वाले पाने का हक रखते है,
त्याग करने वाला ही दयालुता की मिसाल बनता है।
नम्रता की खान वाले होते है दुनिया की सच्ची शान,
हर धनवान उनके सामने निर्धन नजर आते है।
लोगों के लिये जीने वाला सच्चा संत होता है,
उस पूर्णंता को पाये पुरूष के लिये अपना पराया कुछ नहीं होता है।
मेहनत का दूसरा नाम मजदूर और किसान होता है,
जो सारे समाज की सच्ची पहचान होता है।


- डॉ.संतोष सिंह