VIEW HYMN

Hymn No. 259 | Date: 06-Aug-1998
Text Size
फीका है सब कुछ तेरे सामने, तेरी दुनिया तो क्या यें ब्रह्माण्ड सारा,
फीका है सब कुछ तेरे सामने, तेरी दुनिया तो क्या यें ब्रह्माण्ड सारा,
तेरे बोल सा सुरीला कोई बोल ना है, जिसने सुना अपने अंतरमना में सुनना चाहे बार-बार;
तुझसा सुंदर कोई ना है, तेरी झलक देखी जिसने लटटु हो गया तुझप;
जो आया शरण एक बार तेरे, भटकते मन को चैन न आये तेरे श्री चरणो बिन;
जनम – जनम के भटके हुये को शांति मिलती है तेरे दर पे ;
जीव हो या अजीव हर कोई मचले देखके तुझे, तडपे पास आने को तेरे;
मूल्यवान चीजे बार – बार मिलती है जीवन में, तू तो कई जनमें में इक् बार ही मिलता है;
तेरे संग गुजारें एक – दो पलों पे कूर्बान है ये सारा जीवन,
होता है गर्व कभी अपने आप पे जो तू मिल गया है मुझको कुर्बान करना चाहूँ सब कुछ तुझपे
सूर्य के आगे ना कोई टिका है दम नहीं हममें जो रह सके तेरे संग, वो तेरी कृपा है जो रह लेते है साथ तेरा


- डॉ.संतोष सिंह