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Hymn No. 2633 | Date: 02-Jan-2003
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सबपे सब कुछ लुटा देना, पर ओझल न होना नजरों से।
सबपे सब कुछ लुटा देना, पर ओझल न होना नजरों से।
प्यार से सारे दिलों को साराबोर करना, उल्फत भरी नजरों से हमको देख लेना।
जलूँ तिल तिल करके तेरे प्यार में, रूह भी कांप जाये हाल देखके तन का।
आँसू करे घी का काम, और भड़क उठे दिल की आग।
जिंदा फनाह हो जाऊँ, तेरे प्यार कि कोई गुमनाम दास्ताँ बनके।
कर न सका कुछ चाहा तेरा, तो कैसे मिलेगी रूह को राहत मेरी।
फिर भी अंजाम देना, कसूरवार को जी भरके तू सजा देना।
मिसाल कायम हो जमाने में, करे न दिल कभी मनमानी प्यार में।
दोष देगा ना कोई तुझे, अंजाम होता है ये फितरतों में डूबे लोगों का।
रास्ता दिखाया न जाने कितनी बार, पर हमको चलना न आया।


- डॉ.संतोष सिंह