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Hymn No. 2636 | Date: 04-Jan-2003
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मांगने को अगर कहते हो तो, दे दो तुम्हारी अकूत मोहब्बत।
मांगने को अगर कहते हो तो, दे दो तुम्हारी अकूत मोहब्बत।
जानने के लिये अगर कहते हो तो, दे दो तुम्हारा अकूत ज्ञान।
बिन इनके लिखा न गया कोई अफसाना चाहे हो तेरे कितने अफसाने।
कोई एक पल में जलके खाक होता है, तो कोई हर पल जलते तुझे याद करते है।
खाक होने का कोई गम नहीं, ख़ाक हो जाने से पहले हो जाना चाहते हैं रोशन।
दास्ताँ बड़ी अजीब है तुझसे मांगके, तुझको देने की तमन्ना हैं रखते।
भलें वख्त में तो थे हजारों हाथ, बुरे दिन में तेरे सिवाय न है कोई साथ।
हँसता हूँ अपना हाल देखके, उससे भी ज्यादा हालातों का रोना रो रोके।
इस अदने के लिये तूने क्या न किया, बिन बोले न जाने कितना कुछ सहा।
रहा नहीं जाता अपने आप में, जो सब कुछ जानते कर न पाऊँ तेरे लिये।


- डॉ.संतोष सिंह