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Hymn No. 2639 | Date: 15-Jan-2003
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रहो तुम सुकूँ से, दुऑ मांगता हूँ परमपिता से,
रहो तुम सुकूँ से, दुऑ मांगता हूँ परमपिता से,
ऐवज में अपने हिस्सें का पाया हुआ, तुझसे तुझको देना चाहता हूँ।
प्यार की न हो कोई कमीं, मिले प्यार तुमको सारे जहाँ का,
नजर न लगे मेरी, उससे पहले फूट जाये जो नजर मेरी।
ख़ाकसार ख़ाक है तेरे चरणों की, फिर भी देना चाहे बहुत कुछ,
भले नमक के बराबर हो, पर छाप छोड़ देना चाहता हूँ तेरे दिल पे।
गुजरने को तो गुजर जाता है सब कुछ, नागवार पल तेरे मिल जाये किस्मत में मेरी।
एक और कहकहा लगाऊंगा, हाल देखके अपनी जिंदगी का।
फिकर न कर तू जरा भी, फिक्र जो लिखी हो किस्मत में मेरी,
आधा तो गुजर गया यूं ही, आधा गुजर जायेगा यादों में तेरी।


- डॉ.संतोष सिंह