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Hymn No. 2640 | Date: 15-Jan-2003
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मेरे आसुओं पे न जाना, है वो बड़े छलिये,
मेरे आसुओं पे न जाना, है वो बड़े छलिये,
मगरमच्छ के आँसू हो सकते है एक बार को सच्चे, पर मेरे तो है खारे के खारे।
इसमें दोष न है किसीका, ये तो है मेरे कर्मों के सारे,
बेदर्द जमाने की चपत लगे तो लगने देना, ये तो पैमाना है प्रारब्ध का।
अंदाज है सबका अपना अपना, कहा तेरा कर जाने का,
अपना अंदाज है न जाने कैसा, लाख कहे तू तो चाहके भी न कर पाने का।
तेरी छत्रछाया में, अंजाम को पाते है न जाने कितने तेरे इशारे पे,
लाख दिया न जाने तूने कितना सहारा, फिर भी न पहुँचे तेरे ठिकाने पे।
छोड़ने को तो कह नही सकता, पाऊँगा ये भी नही जानता,
पूरे दिल से तेरा शुक्रिया अदा करता हूँ, तेरे संग रहके गुजर जाने का।
लोग तो दुनिया को ठगते हैं, हमने तो दुनिया के संग तुझको भी न छोड़ा,
एक बार नहीं न जाना कितनी बार तूने छोड़ा, फिर भी हममे कहाँ तेरा न माना।


- डॉ.संतोष सिंह