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Hymn No. 2642 | Date: 29-Jan-2003
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कुछ कहना चाहे दिल, धड़क धड़क के रह जाये वो।
कुछ कहना चाहे दिल, धड़क धड़क के रह जाये वो।
है प्रभु पड़ा पाला मेरा किससे, जिसके पास न है कुछ।
तन से है रूखा, मन से भी है झूठा, बातों का हैं भूखा।
कहता है तो करना भी कुछ, करना आये बिलकुल भी कुछ।
लाख खाये फटके, सीखा नही अपने अनुभवो से।
हजारों कसमें खाके, झूठी - खुशी में बिसराये जिंदगी को।
पहचाना न अपने आप को, पहचानने चला दूसरों को।
जिन्होंने जिया जिंदगी को, उनको समझाने चला बंदगी।
उफ् कर दिया परायों ने, सारी पहचान को भुलाया अपनों ने।
ये मूर्ख तब भी बाज न आये अपने कारस्तानी से।


- डॉ.संतोष सिंह